कोरोना की वजह से पूरी दुनिया में त्राहिमाम मचा हुआ
है. जहाँ देखो वहां हर दूसरे बन्दे को कोरोना हो रखा है. ऐसे में जरुरी है कि सही
तरीके से उसका इलाज करवाया जाये साथ ही वक़्त रहते उसपर काम किया जाये. साथ ही
कोविड-19 की जांच में भी कई बार साफ नहीं हो पाता है कि मरीज़ संक्रमित है या
नहीं। कोरोना की जांच के लिए आरटी-पीसीआर (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमरेज़ चेन
रिएक्शन) टेस्ट को उच्च स्तर का परीक्षण माना गया है, लेकिन क्या आप
जानते हैं कि जिस आरटी-पीसीआर जांच पर हम निर्भर हैं, उसकी सटीकता महज
70 प्रतिशत है। यानी ज़रूरी नहीं है कि इसका नतीजा हर बार सही ही आए।
पिछले एक साल में ऐसा कई बार देखा गया कि कोरोना के लक्षण
होने के बावजूद टेस्ट में व्यक्ति नेगेटिव पाया जाता है। इस साल भी ऐसे मामले
सामने आए जिसमें ज़्यादातर मरीज़ों की रिपोर्ट 72 घंटे में दो से तीन बार पॉजिटिव
और निगेटिव हो रही है। एक ही मरीज़ की रिपोर्ट जल्दी-जल्दी निगेटिव और पॉजिटिव आने
से एक्सपर्ट्स तेज़ी से म्यूटेशन की आशंका भी जता रहे हैं। आरटी-पीसीआर टेस्ट भी
वायरस के जीन को पकड़ने में हर बार सफल नहीं हो पा रहा है।
उजाला साइनस ग्रुप ऑफ़ हॉस्पिटल के डायरेक्टर और
फाउंडर डॉ. शुचिन बजाज ने कहा, "आरटी पीसीआर की संवेदनशीलता और सटीकता 100% नहीं है।
इसलिए अगर इसे ठीक से नहीं किया जाता है, तो हमें गलत निगेटिव टेस्ट
रिजल्ट मिलता है। कभी-कभी यह एक ऑपरेटर बेस्ड समस्या होती है क्योंकि सैम्पल को
ठीक से एकत्र नहीं किया जाता है क्योंकि सैम्पल को नासोफरीनक्स और ऑरोफरीनक्स से एकत्र
किया जाता है या नेज़ल स्वैब नाक में नहीं बल्कि नाक के पीछे लगायी जाती है।
कभी-कभी जांच नाक के पीछे नहीं हो पाती है और सैम्पल नाक से ही ले लिया जाता है, जिसके
परिणामस्वरूप टेस्ट किया जा सकता है, जोकि गलत रिज़ल्ट बताता है। यही
कारण है कि हमें टेस्ट में वायरस होने का पता नहीं मिलता है। लेकिन अगर हम इसे ठीक
से करें, तो एक दिन बाद
हमें पॉजिटिव रिज़ल्ट मिल सकता है।"
लक्ष्ण होने
के बावजूद टेस्ट नेगेटिव आए तो क्या करें?
विशेषज्ञों ने
आगाह किया है कि कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद भी कुछ लोगों के जांच परिणाम
नेगेटिव आ सकते हैं इसलिए जिन लोगों में बीमारी के लक्षण दिख रहे हों उनमें
संक्रमण की पुष्टि संबंधी जांच का इंतजार किए बिना ही उनका इलाज किया जाना चाहिए
ताकि संक्रमण गंभीर रूप न ले।
डॉक्टरों का
कहना है कि ऐसे कई मामले हैं जिनमें मरीज़ों में कोविड-19 के लक्षण दिख रहे हैं, लेकिन उनकी जांच रिपोर्ट कई बार नेगेटिव आई है। बार-बार
जांच किए जाने के बाद उनमें संक्रमण की पुष्टि हुई। आरटी-पीसीआर जांच की सटीकता
महज 70 प्रतिशत है और रेपिड एंटीजन टेस्ट की संवेदनशीलता भी महज 40 प्रतिशत है।
सावधानी ही है
सबसे अच्छा बचाव
कोविड-19
की दूसरी लहर पिछले साल से ज़्यादा संक्रामक और घातक साबित
होती दिख रही है। पिछले साल जहां कोरोना ने ज़्यादातर बुज़ुर्गों को अपना शिकार
बनाया था,
वहीं इस साल बच्चों और गर्भवती महिलाओं की संख्या ज्यादा
देखी जा रही है। कोरोना की वैक्सीन ज़रूर उपलब्ध हो गई है,
लेकिन ये हमें कोरोना के संक्रमण से नहीं बचाएगी,
सिर्फ ये इस वायरस का जोखिम को कम करेगी। इसलिए समझदारी इसी
में है कि सावधानियां बरतें। मास्क पहने, लोगों से शारीरिक दूरी बनाए रखें,
हाथों को दिन में कई बार धोएं और जितना हो सके घर में रहें।
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