मई 2020 तक 9 हजार 690 करोड़ रुपए आए, अब तक 5 हजार 300 करोड़ के खर्च का आंकड़ा सामने आया
पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हाल में एक ट्वीट में PM केयर्स फंड पर सवाल उठाया। उन्होंने लिखा, 'ना टेस्ट हैं, ना हॉस्पिटल में बेड, ना वेंटिलेटर हैं, ना ऑक्सीजन, वैक्सीन भी नहीं है, बस एक उत्सव का ढोंग है। PMCares?' इसके बाद ट्विटर पर #PMCares टॉप ट्रेंड में आ गया। इसमें सोशल मीडिया यूजर्स दो हिस्सों में बंटे और जमकर बहस की। उन बहसों से अलग हम यहां अब तक PM केयर्स फंड को लेकर जो पुख्ता आंकड़े सामने आए हैं, उन्हें बता रहे हैं-कितना पैसा आया?
PM केयर्स फंड में अब भी डोनेट किया जा सकता है। इसको लेकर सरकार ने कोई आंकड़ा अब तक जारी नहीं किया है। यह फंड सूचना के अधिकार यानी RTI के दायरे में भी नहीं आता। लेकिन 28 मार्च को PM मोदी की ओर से ट्वीट के बाद डोनेट करने वालों ने इसका सार्वजनिक ऐलान करना शुरू कर दिया था।
4 जून तक जिन लोगों ने अपने डोनेशन सार्वजनिक किए, वे पैसे कुल 9,690 करोड़ रुपए थे। इसका विवरण हमने नीचे ग्राफिक में दिया है-
कहां-कहां खर्च हो रहे हैं PM केयर्स के पैसे
खर्च 1: PMO ने 13 मई 2020 को 3100 करोड़ रुपए के खर्च की जानकारी दी थी। इसके अनुसार, 2 हजार करोड़ रुपए से 50 हजार मेड इन इंडिया वेंटिलेटर खरीदने की बात हुई। उस वक्त देश में सबसे ज्यादा वेंटिलेटर की कमी थी। महामारी से पहले तक हर साल महज 3360 वेंटिलेटर बन रहे थे। खर्च 2: महामारी की दूसरी सबसे बड़ी समस्या प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचने को लेकर हुई।इसलिए एक हजार करोड़ रुपए प्रवासी मजदूरों की सहायता के लिए तय किए गए।
खर्च 3: सबसे बड़ी चुनौती वैक्सीन थी। तब 100 करोड़ रुपए वैक्सीन की रिसर्च पर खर्च करने की बात की गई।
खर्च 4: 2 फरवरी 2021 को PM केयर्स फंड के खर्चों के सचिव टीवी सोमनाथन ने बताया कि PM केयर्स फंड से कोरोना वैक्सीन लगाने के पहले चरण का 80% खर्च निर्वहन किया जा रहा है। इसके तहत 2,200 करोड़ खर्च होने का अनुमान था। असल में साल 2020 के बजट में कोरोना वैक्सीन लगाने के लिए कोई बजट नहीं आवंटित नहीं किया गया था। इसलिए जनवरी से लेकर मार्च 2021 के बीच कोरोना वैक्सीन लगाने का जो खर्च आया उसे PM केयर्स फंड से दिया गया।
खर्च 5: कोरोना की दूसरी लहर आने पर सबसे ज्यादा परेशनी की खबरें ऑक्सीजन की कमी की आईं। अब PM केयर्स फंड से 12 राज्यों में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के 100 अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए जाएंगे और 50 हजार मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन का आयात भी किया जाएगा।
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